भारत में बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड हीटवेव के बीच कई भारतीय नवप्रवर्तक (innovators) अब प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर नए समाधान विकसित कर रहे हैं।
- संदीप पांडेय
- 18 मई
- 2 मिनट पठन
भारत में बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड हीटवेव के बीच कई भारतीय नवप्रवर्तक (innovators) अब प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर नए समाधान विकसित कर रहे हैं। खासतौर पर मिट्टी (terracotta), प्राकृतिक वेंटिलेशन और evaporative cooling जैसी सदियों पुरानी तकनीकों को आधुनिक वास्तुकला और डिजाइन में फिर से अपनाया जा रहा है।
एक प्रमुख उदाहरण दिल्ली की कंपनी का “CoolAnt” प्रोजेक्ट है, जिसमें टेराकोटा आधारित cooling facade का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना में पानी प्रवाहित करके प्राकृतिक वाष्पीकरण (evaporation) से आसपास का तापमान 6–8 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है।
भारत में मिट्टी के घड़े और “मटका कूलिंग” की परंपरा हजारों वर्षों से मौजूद है। अब इसी सिद्धांत का उपयोग आधुनिक clay refrigerators, terracotta walls, cooling tiles और eco-friendly air coolers बनाने में किया जा रहा है। जैसे ब्रांड बिजली के बिना चलने वाले मिट्टी के फ्रिज तैयार कर रहे हैं, जो भोजन और पानी को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि passive cooling तकनीकें एयर कंडीशनर पर निर्भरता कम कर सकती हैं और ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकती हैं। पारंपरिक भारतीय वास्तुकला में उपयोग होने वाले मोटी दीवारें, आंगन (courtyards), जालियां (jaalis) और मिट्टी आधारित निर्माण सामग्री आज फिर से आधुनिक भवनों में लौट रही हैं।
हाल के वर्षों में भारत में तापमान कई क्षेत्रों में 45°C से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में low-cost और sustainable cooling solutions की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। वैज्ञानिक और वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि “ancient wisdom + modern technology” का यह मेल भविष्य में भारत समेत दुनिया के गर्म देशों के लिए बड़ा समाधान बन सकता है।




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